मूलांक क्या है? अर्थ और इसे निकालने का तरीका
मूलांक भारतीय अंक ज्योतिष का मूल अंक है: महीने की वह तारीख जिस दिन आपका जन्म हुआ, जिसे 1 से 9 के बीच एक अंक तक घटाया जाता है। इसे साइकिक नंबर या जन्मांक भी कहा जाता है।
मूलांक का अर्थ
यह शब्द मूल, यानी जड़, और अंक, यानी संख्या, से मिलकर बना है: आपकी जड़ में बसा अंक।
परंपरा इसे आपके स्वभाव के रूप में पढ़ती है: आप स्वयं को कैसे देखते हैं, और आपके सबसे करीबी लोग आपका वर्णन कैसे करेंगे। हर अंक का स्वामी एक ग्रह है, 1 के लिए सूर्य से लेकर 9 के लिए मंगल तक, और उसे उन्हीं बातों से पढ़ा जाता है जिनका वह ग्रह कारक है।
हर भाषा में मूलांक
- English
- मूलांक (मूल अंक या साइकिक नंबर)
- हिन्दी
- मूलांक
- मराठी
- मूलांक
- ગુજરાતી
- મૂળાંક
- বাংলা
- মূলাঙ্ক
- தமிழ்
- பிறவி எண்
अपना मूलांक कैसे निकालें
जन्म की तारीख लीजिए और उसके अंक तब तक जोड़िए जब तक एक अंक न बचे: 29 तारीख को जन्म हुआ हो तो 2 + 9 = 11, और 1 + 1 = 2। महीने और वर्ष की इसमें कोई भूमिका नहीं; वे भाग्यांक में गिने जाते हैं।
मूलांक 1 से 9
- 1मूलांक 1: खुद आगे बढ़ने वालासूर्यमूलांक 1 का स्वामी सूर्य है। इसे स्वतंत्र, स्पष्टवादी और खुद पहल करने वाला माना जाता है: ऐसा व्यक्ति जो किसी के अधीन रहने के बजाय नेतृत्व करना पसंद करता है।
- 2मूलांक 2: सहज समझ वाला श्रोताचंद्रमूलांक 2 का स्वामी चंद्र है: कोमल, अंतर्ज्ञानी और माहौल को जल्दी भाँप लेने वाला, जिसका मन अक्सर आसपास के लोगों के साथ बदलता है।
- 3मूलांक 3: जन्मजात शिक्षकगुरुमूलांक 3 बृहस्पति का अंक है: अभिव्यक्तिशील, जिज्ञासु और प्रोत्साहित करने वाला, जिसमें शिक्षक जैसी सहज प्रवृत्ति होती है और ज़रूरत से ज़्यादा ज़िम्मेदारियाँ ले लेने की आदत भी।
- 4मूलांक 4: सुधारकराहुमूलांक 4 का स्वामी राहु है: मौलिक, व्यवस्थित और उन बातों पर जल्दी सवाल उठाने वाला जिन्हें बाकी सब मान चुके हैं।
- 5मूलांक 5: जिज्ञासु संवादकबुधमूलांक 5 का स्वामी बुध है। इसे तेज़, जिज्ञासु और परिस्थिति के अनुसार ढलने वाला माना जाता है: ऐसा मन जो जल्दी सीखता है, सहजता से बात करता है और विविधता में खिलता है।
- 6मूलांक 6: सामंजस्य का रक्षकशुक्रमूलांक 6 का स्वामी शुक्र है। इसे स्नेही, सुरुचिपूर्ण और अपनों के प्रति समर्पित माना जाता है, जिसमें जीवन को सामंजस्यपूर्ण बनाए रखने की गहरी इच्छा होती है।
- 7मूलांक 7: शांत विचारककेतुमूलांक 7 का स्वामी केतु है। इसे अंतर्मुखी, विश्लेषणात्मक और स्वतंत्र सोच वाला माना जाता है: ऐसा व्यक्ति जो गहराई से सोचता है और इसके लिए उसे एकांत चाहिए।
- 8मूलांक 8: धैर्यवान निर्माताशनिमूलांक 8 का स्वामी शनि है। इसे धैर्यवान, गंभीर और भरोसेमंद माना जाता है: ऐसा व्यक्ति जो धीरे-धीरे बनाता है और जो बनाता है वह लंबे समय तक टिकता है।
- 9मूलांक 9: रक्षकमंगलमूलांक 9 का स्वामी मंगल है। इसे साहसी, रक्षा करने वाला और तुरंत कदम उठाने वाला माना जाता है: जब कुछ करना हो तो सबसे पहले आगे आने वाला।
पद्धति और स्रोत
- अंक: भारतीय पद्धति, जिसमें हर संख्या को 1 से 9 के बीच एक अंक तक घटाया जाता है (कोई मास्टर नंबर नहीं), और हर अंक का स्वामी एक ग्रह है: 1 सूर्य, 2 चंद्र, 3 गुरु, 4 राहु, 5 बुध, 6 शुक्र, 7 केतु, 8 शनि, 9 मंगल। कीरो का अनुसरण करने वाला पाश्चात्य अंक ज्योतिष इसके बजाय 4 यूरेनस को और 7 नेपच्यून को देता है।
- अनुकूल और प्रतिकूल अंक: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में बताई गई ग्रहों की नैसर्गिक मित्रता, वही नियम जो गुण मिलान में लगता है; इसमें राहु को शनि के और केतु को मंगल के स्थान पर लिया जाता है (“शनिवत् राहु, कुजवत् केतु”)।
- नामांक: कैल्डियन अक्षर मान, जैसे कीरो ने प्रकाशित किए थे, अंग्रेज़ी अक्षरों में लिखे नामों के लिए।
- रंग, वार, रत्न और मंत्र: वही जो ज्योतिष में स्वामी ग्रह के हैं। दूसरे अंकशास्त्री अलग वार और रंग बताते हैं, खासकर 4 और 7 के लिए, जिनके ग्रह किसी वार के स्वामी नहीं हैं।
- ये पाठ परंपरा पर आधारित हैं, भविष्यवाणियाँ नहीं: यहाँ कुछ भी चिकित्सीय, वित्तीय या कानूनी सलाह नहीं है, और न ही अपने-आप में कोई फ़ैसला लेने का आधार।