पाश्चात्य जन्म कुंडली
सायन राशिचक्र, दस ग्रह और आपके भाव — वही आकाश जिससे आपकी कुंडली बनती है, बस दूसरी तरह से पढ़ा गया।
आपको क्या मिलता है
- आपका सूर्य, चंद्र और लग्न, और दसों ग्रह कहाँ थे।
- बारह भाव, प्लासिडस, संपूर्ण-राशि या समान भाव पद्धति में।
- ग्रहों के बीच हर पहलू, सबसे तंग पहले।
- कुंडली में तत्त्वों और स्वभावों का संतुलन।
यह मेरी कुंडली से कैसे अलग है?
पश्चिमी ज्योतिष राशियों को वसंत विषुव से नापता है (सायन राशिचक्र)। वैदिक ज्योतिष उन्हें तारों से नापता है, अयनांश घटाकर — पिछले सौ सालों में जन्मे लोगों के लिए लगभग 23 से 24 अंश। इसलिए यहाँ किसी राशि के अंत में खड़ा ग्रह आपकी कुंडली में अक्सर उससे पिछली राशि में होता है। दोनों एक ही आकाश की एक ही स्थितियों से निकाले गए हैं।